S
Shreyanshi Brahmachary


एक लड़की के नैनो में हजारों बड़े सपने, पर डर समाज का, डर परिवार का, डर खुद का................. आखिर कैसे पूरे करेगी वह "अपने सपने"!


Inspirant Tout public.
1
1.8k VUES
Terminé
temps de lecture
AA Partager

डर तो सबका है.........

यह कहानी एक लड़की की है, जिसकी मासूमियत से पर्वत झूमने लगते हों, जिसकी मिट्ठी आवाज़ से लगता हो कि कृष्ण जी स्वयं आ कर बंसी बजा रहे हों, जिसकी एक हस्सी सबका मन मोह लेती हों, जिसकी छोटे मासूम नानों में हजारों बड़े सपने हों, उसका नाम लता था! लेकिन लता एक ऐसे समाज में रहती थी जहां लड़कियों को अपने सपने पूरा करने का कोई हक नही था।पर वह खुशनसीब थी, क्योंकि वह एक ऐसी घर की बेटी थी जहां लड़कियों को कुछ आज़ादी मिल जाती थी। पर वह जो आज़ादी चाहती थी, वोह नामुमकिन थी।

'नाचना'………………. जी, जिस समाज में वह रहती थी उसमे नाचना एक गुन्हा था! वह सारे दुख अपने डायरी में लिखती थी। लता ने बचपन से लेकर आज तक कभी भी झूट नहीं बोला। पर जब उसने रेडियो, अखबारों, किताबों में लड़कियों के आज़ादी के बारे में बहुत सुना, तो उसने सोचा कि अगर सबको अपने सपने को पूरा करने का हक है, तो लड़कियों को भी होना चाहिए। और उसने सोच लिया कि वह भी अपने सपनों को पूरा करेगी। वह अपने घर वालों से झूट बोलकर कत्थक सीखने जाती। उसने झूट बोला, लता ने कोई धोका नहीं दिया, उसने अपने किमती सपनों के लिए झूट बोला।


वह कत्थक सीखने तो जाती थी पर उसकी गुरु उससे नज़र अंदाज़ कर देती थी। तो उसने सोचा कि, क्यूं न वह कत्थक सीखने के जगह जा कर देखे। यह बात उसकी चचेरी बहन को पता चल गई। उसकी चचेरी बहन उससे बहुत जलती थी। उसकी बहन ने यह बात अपने बड़े पापा, यानी लता के पापा को बता दी। उसके पापा इस बात पर आग बबूला हो गए। वे तुरंत ही नृत्य भवन पहुंच गए। उन्होंने लता पर बहुत गुस्सा किया, उनका तो मन कर रहा था कि वह एक-दो चाटे भी लगा दे, पर वह अपनी बेटी के प्यार में मजबूर थे। उन्होंने कहा कि “ नहीं, गलती मेरी ही है, की मेरे संस्कारो में ही कोई कमी रह गई होगी।और इस गलती कि सजा मुझे मिलनी ही चाहिए। तो आजसे, बल्कि अभि से में अपनी बेटी से बात नहीं करूंगा।”

यह सुनते ही लता को अपने आप पर बहुत ज़्यादा गुस्सा आया। वह सबका विस्वास तोड़ सकती थी, पर अपने पापा का विस्वास नही तोड़ सकती थी। पर वह जानती थी कि उसे क्या करना है। कल महावीर जयंती थी, और इस दिन उसके घर में बहुत बड़ी पूजा रखी जाती थी, महावीर जी सब अच्छा ही करते हैं। उसने हिम्मत कर अपने पापा से कहा कि “ पापा आपके संस्कार तो इतने अच्छे हैं कि, मैं सुबह उठती हूं तो सबसे पहले भगवान का चेहरा देखती हूं, मैं भगवान को भोग लगाने के बाद ही अपने मुंह में अनन डालती हूं, डर लगता है तो हनुमान चालीसा पढ़ती हूं। पापा यह हैं आपके संस्कार।” उसके पापा ने अपनी बेटी के आंखों से गिरते आसूं देख और बाते सुनकर अपनी बेटी को गले लगा लिया, और उसे माफ़ कर दिया। लता अपने कमरे में जाकर रोने लगी। उसकी एक आंख में खुशी के आसूं थे क्यूंकि उसके पापा ने उसे माफ़ कर दिया था, और दूसरी में दुख के आसूं थे क्यूंकि न चाहते हुए भी उसे अपने सपने छोड़ने पड़ेंगे। क्यूंकि वह सब कुछ बरदाश कर सकती थी, लेकिन अपने पापा का दुख नहीं। उसने अपने आप को समझाया कि कभी सपनों के लिए अपनों से लड़ना पड़ता है, तो कभी अपनों के लिए सपनों से!

उसने एक कोरे कागज़ पर लिख दिया कि ‘ लड़कियों को अपना सपना पूरा करने का कोई हक नहीं है।' और उसे वहां डाल दिया जहां अखबार छापे जाते हैं। पर लता ने उसका नाम उस कागज़ पर नहीं लिखा, ताकि उसके पापा को नहीं पता चले, और वह चाहती भी नहीं थी कि कोई उसे प्रोत्साहित करे।

आगे क्या होगा, क्या लता फिर से कत्थक करेगी, या फिर वह अपनी पूरी जिंदगी अफ़सोस करेगी?

क्या होगा आगे?

जानने के लिए पढ़िए "अपने सपने (पार्ट 2)

29 Mai 2021 05:50:55 1 Rapport Incorporer Suivre l’histoire
2
La fin

A propos de l’auteur

Commentez quelque chose

Publier!
OT Ormage Thuft
Very nice!
June 20, 2021, 13:25
~